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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



दिल पार्लर जाए ना


अर्विना गहलोत


 

दिल मेरा कभी पार्लर जाए ना ।
इस दिल का मेकअप कैसे हो कोई बताए ना।

आत्मा मेरी कभी गंगा नहाए ना।
ये मेरे कर्मो के लेखे जोखे मेरे साथी ।
यही इस जगत में रह जाए ना।
मन को निर्मल ,वाणी कोमल बनाए ना।
तेरे पाप की गठरी गंगा बहाए ना।

दिल मेरा कभी पार्लर जाए ना।
इस दिल का मेकअप कैसे हो कोई बताए ना।

दिल से अकर्मण्यता भ्रष्टाचार तू भगाए ना।
इतनी बिमारी तेरे दिल में भरी इनको मिटाए ना।
इनको मिटाए बिना तू सद्गति पाए ना ।
क्यों तू समझे ना क्यों समझाए 
जगत में क्या तू लाया क्या ले जायेगा।

दिल  मेरा कभी पार्लर जाए ना।
इस दिल का मेकअप कैसे हो कोई बताए ना।

सुन्दर विचार औरों से प्यार तेरा दिल समझ जायेगा ।
तेरे दिल में दिव्य ज्योति जागृत हो जायेगी ।
उस दिन तेरी आत्मा का स्नान हो जायेगा।
जीवन का ये सूत्र जब तेरी समझ आयेगा।
तब तक तू इस दुनियां से विदा हो जायेगा।

दिल मेरा कभी पार्लर जाए ना।
इस दिल का मेकअप कैसे हो कोई बताए ना।


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