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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



समय बड़ा बलवान


गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान'


 


भ्रम जाल में उलझ गया सीधा सा इंसान,
सूर्य ग्रहण सत्य है, समय बड़ा बलवान।

टूट-टूट कर आदमी, रहा जरा सा जोड़,
रेशम कीट बुनता रहा,मृत्यु का समान।

हरिश्चंद्र राजा बिका, बिका एक इंसान,
अब राजा, राजा रहें, बिके भलो ईमान।

स्याह रात में जिसका, रोशन रहा चिराग,
'हिन्दुस्तान'  ये कह रहा, है वो 'हिन्दुस्तान'।


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