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वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



जीवन अजब कहानी


डॉ. राधिका गुलेरी भारद्वाज


  

मालिक रहमत बहता पानी
हर मोती की पृथक कहानी
क्यूँ कर कांटे बोता बन्दे
उसके आगे सब बेमानी

इक ही माँ के पेट के जाए
इक घर इक माहौल में पलते
संग में खेंलें संग हैं झगड़ते
फिर न किस्मत एक समानी

अजब रचा है रंग-मंच यह
उसका जीवन उसकी वाणी
बूढ़ा-बच्चा इक सा दिखता
“किरदारे- ख़ास” इसमें है जवानी

आदम मद में मस्त दिख रहा
इर्षा अग्नि में लिप्त सिक रहा
लोभ-मोह ने जकड़ा ऐसे
माने ‘अमर’ ख़ुद को अज्ञानी

कर्म करें अब पाकीज़ा कुछ
सच से कब तक आनाकानी
याद रहेंगी बातें वह ही
जो अच्छी हों और सुहानी

न जाने कब टूटें सांसें
और होगी यह ख़त्म कहानी
बोले ‘राधा’ कान्हा के घर
कब जाने हो जाए रवानी

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