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वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



तोता मैना


लक्ष्मी नारायण गुप्त ''गहोई ''


मैना तोते के  कानों में,  चोंच सटा कर  बोली धीरे |    
प्यार भले ही करते है हम, पर रिश्तों में  निपट अधूरे ||
  
ऋतु वसंत संत सा मौसम, कहलाता है यह ऋतु-राज |     
आने वाले  कल का निर्णय, क्यों नहीं कर लेते आज || 

माघ पंचमी सा पावन दिन, बिन महूर्त होती हैं शादी | 
मन के भीतर का अनंग अब, बनने को आतुर अपराधी || 

अभी समय है डेढ़ माह का, सोच समझ कर निर्णय लेना | 
बिन विवाह के यों ही रहना, या विवाह करके फिर रहना  ?  

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