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वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुनर्प्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। साहित्यसुधा में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और साहित्यसुधा टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है। साहित्यसुधा एक सम्पूर्णतः साहित्यिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य सभी रचनाकारों को प्रोत्साहित करके हिंदी को बढ़ावा देना है | इसके माध्यम से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं को सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा।

साहित्यसुधा

संपादकीय मंडल:-

संपादक - डॉ०अनिल चड्डा 

सह-संपादक - अखिल भंडारी  Akhil Bhandari

साहित्यिक समाचार





डॉ गुलाब चंद पटेल जयपुर में होंगे सम्मानित



सामाजिक कार्य कर नशा मुक्ति अभियान प्रणेता ब्रेस्ट कैंसर अवेर्नेस प्रोग्राम आयोजक तथा हिन्दी गुजराती कवि लेखक अनुवादक और इंडियन लायंस गांधी नगर, पूर्व ऑफिस सुपरिटेंडेंट जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक ऑफिस अहमदाबाद, एवं गांधी नगर साहित्य ..............पूरा पढ़ें






हिंदी कवि सम्मेलन संपन्न हुआ


गांधी नगर साहित्य सेवा संस्थान की ओर से दिनांक 11 जुलाई 2020 को दो बजे दोपहर मे अखिल भारतीय ऑन लाइन हिंदी कवि सम्मेलन संस्था की ओर से अध्यक्ष श्री डॉ गुलाब चंद पटेल द्वारा आयोजित किया गया था, जिस का उद्घाटन आदरणीय मुकेश भागो ल ब्यूरो चीफ समाचार निर्देश द्वारा किया गया था, कार्य क्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के बाद की गई थी, सरस्वती वंदना डॉ भावना सावलिया द्वारा किया गया था ..............पूरा पढ़ें






अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन सम्पन्न



शिवपुरी / / भारतीय साहित्य सृजन संस्थान शिवपुरी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान,पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और मध्यप्रदेश के 21 कवियों ने भागीदारी कर 245 रचनाकारों की उपस्थिति में अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया । संस्थान के अध्यक्ष शिवपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार इंजी.अवधेश सक्सेना ने माँ शारदा को नमन ..............पूरा पढ़ें






स्वतंत्रता दिवस-2020 डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता

यदि आप फोटोग्राफी का शौक रखते हैं तो आप द्वारा लिया गया फोटो भी डाक टिकट पर स्थान पा सकता है। डाक विभाग राष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ष "यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स इन इण्डिया (कल्चरल)" थीम पर डाक टिकट डिजाइन फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है, जिस पर एक फोटोग्राफ खींचकर 'माईगव पोर्टल' पर अपलोड करना है। ..............पूरा पढ़ें






सरिता सुराणा का नाम द ब्रिटिश वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज


तेरा पंथ धर्मसंघ के दशमाचार्य आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जन्म शताब्दी वर्ष (1920-2020) के उपलक्ष्य में अणुव्रतसेवी डॉ. ललिता जोगड़ व उनकी टीम के द्वारा आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जीवन पर आधारित 1121 लोगों द्वारा लिखित कविताओं के संकलन 'महाप्रज्ञ' को द ब्रिटिश वर्ल्ड रिकॉर्ड, लंदन में रिकॉर्ड के लिए भेजा गया। इसके साथ ही इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड ..............पूरा पढ़ें






अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक आफ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता।


सुदर्शन सोनी द्वारा लिखी पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ एक ऐसा व्यंग्य संग्रह जिसके सभी 34 व्यंग्य केवल कुत्तों पर केन्द्रित हैं। अपनी तरह की पहली पुस्तक होने के कारण यह चर्चा में रही। प्रसिद्व व्यंग्य कार आलोक पुराणिक द्वारा इसे संपूर्ण एशिया की केवल श्वानों पर लिखे व्यंग्यों की पहली कृति माना गया है। डाक्टर ज्ञान चतुर्वेदी जी द्वारा इसे व्यंग्य में नया प्रयोग कहा है। ..............पूरा पढ़ें


समपादक की और से

“तीन एहसास”
(1) काँटों में खिल कर भी फूल कभी काँटा हुआ है तो फिर ऐ मेरे दोस्त स्वयँ को फूल कह कर काँटों की तरह चुभते क्यों हो? (2) हमने तो शमा की तरह जल कर तुम्हारे लिए किया था अँधेरों को रौशन तुम फिर भी मुँह काला कर चल दिए ! (3) रिश्तों को बू समझने वालो कभी अपने पसीने से भी बू आई है? - डॉ० अनिल चड्डा

अब तक

आपके पत्र


लोक प्रिय वेब पत्रिका "साहित्य सुधा " का जुलाई द्वितीय 2020 अंक पढ़ा। अंक में संकलित कविता, कहानी, लघुकथा, संस्मरण सभी पठनीय हैं। इस अंक में मूर्धन्य साहित्यकार, प्रख्यात भाषाविद और सुधी समीक्षक डॉ शंकर सिंह तोमर का महाभारत महाकाव्य पर केंद्रित लेख "महाभारत जीवन जीने की कला" ने विशेष आकर्षित किया। मेरे मत में यह अभूतपूर्व लेख है।
लेखक ने महाभारत के विभिन्न प्रसंगों, घटनाओं के बारे में अपने ढंग से विचार व्यक्त किये हैं जिन पर मुझ सहित हर किसी का सहमत होना आवश्यक नहीं है पर इस लेख में कई आप्त-वाक्य मिले हैं, (जो मोटे अक्षरों में उल्लेखित किये गए हैं।) जो निश्चित रूप से मननीय हैं। इन आप्त वाक्यों में से दो ने विशेष रूप से मेरा ध्यान आकर्षित किया है।
महाभारत कालातीत यथार्थ है, जबकि रामायण कालातीत आदर्श।
महाभारत का जो ताना-बाना है, उसमें जो घटनाएँ तत्समय घटित हुईं, वे ऐसी घटनाएँ हैं जो आज भी घटित हो रही है, भविष्य में भी घटित होती रहेंगी। सांसारिक मनुष्य की सोच ही ऐसी है कि वह उसके जन्म से अंत तक इस लेख में वर्णित मनोभावों के आसपास ही घूमती रहती है।
रामायण जैसा आदर्श अन्यत्र दुर्लभ है।
सत्य, वचन-प्रतिबद्धता काल सापेक्ष होती है, निरपेक्ष नहीं।
"वचनबद्धता" काल सापेक्ष होती है, होनी भी चाहिए; क्योंकि यही सच है इससे इतर सोच केवल आलंकारिक ही कही जा सकती है।
"सत्य" के बारे में यह कहा जा सकता है कि सत्य तो हमेशा सत्य ही होता है वह काल सापेक्ष कैसे हो सकता है।..... सत्य काल सापेक्ष हो सकता है।
कैसे ?
ऐसे-
"सत्यम् वद" के लिए प्रख्यात एक ब्रह्मज्ञानी संत ध्यान क्रिया उपरांत चिंतन-मग्न थे कि उसी समय उनके सामने से तेज गति से भागता हुआ एक हिरण निकलता है। उसकी घबराहट से सन्त समझ जाते हैं कि यह किसी मुसीबत में है। किंचित देर बाद उसी रास्ते से एक बधिक आता है जिससे हिरण आया था। बधिक रुककर संत से पूछता है कि महात्मन क्या अभी इधर आपके सामने से कोई हिरण निकला है?
संत ने कहा-नहीं।
बधिक को ज्ञात था कि यह सन्त सदैव सत्य बोलते हैं; इसलिए वह यह सोचकर वापस लौट गया कि सम्भवतः हिरण किसी और गली से कहीं और निकल गया होगा।
एक काल सापेक्ष सत्य से एक निरीह प्राणी का जीवन बच गया; बधिक के भोजन की पूर्ति तो अन्न, फल-फूल, शाक-पात से भी हो सकती है, हो भी गयी होगी।
एक अच्छे लेख के लिए रचनाकार और सम्पादक को बधाई।

प्रेषक-
(इंजी.) संगीता सिंह
बंगला नम्बर-1
जजेस निवास
सिविल लाइन्स
सिरोंज जिला विदिशा (म.प्र.)

आँचल सोनी हिया की रचना "भोर भई अब बासी रे" के परिपेक्ष्य में।
रचनाकार की रचना अद्वितीय है। उच्च कोटि की लेखन शैली के साथ शब्द चयन भी खूबसूरत है। लेखिका ने संसारिक मोह माया से दूर एक काल्पनिक आन देश की जो कल्पना की है, वाकई बेजोड़ है। हिया जी, इस तरह की रचना और लाए, आप की यह रचना अनमोल है।

धन्यवाद।

पंकज गुप्ता

"छाती पर भार लिए बैठा हूँ।" डॉ चड्ढा की बेहतरीन,यथार्थ परक रचना है।"भरे बाजार में बिकने के लिये, मैं अपने संस्कार लिये बैठा हूँ।" दोनों स्थितियां स्पष्ट होती हैं-इस बाजार-युग में हमने संस्कार भी बेच दिए हैं।यह भी की बाज़ार वाद में भी हम अपने संस्कार सुरक्षित रखने में सफल हुए है।अब "जिसकी रही भावना जैसी" वैसा अर्थ ग्रहण कर सकेगा। "वो चाहें जितना भी दगा कर लें, मैं तो दिल में प्यार लिये बैठा हूँ।" बहुत सुंदर सन्देश है।साहित्य का उद्देश्य भी यही है।यही सत्यं शिवम सुंदरम की स्थिति है।बधाई हो चड्ढा जी को।

- डॉ आर बी भण्डारकर
भोपाल


सुंदर अंक सब रंग विधा का। साहित्य की बहुमुखी प्रतिभाओं का विस्तृत कैनवास ।

सादर
- विश्वमोहन

आभार, इतनी बेहतरीन पत्रिका का।

सप्रेम एवं सादर ,
विश्वमोहन

इस अंक में



13.गोपाल कृष्ण पटेल -

(i)युवा शक्ति
(ii)प्रकृति
(iii)मैं मेहनतकश मजदूर हूँ

14.हंस राज ठाकुर -

(i)कुछ दिनों की बात है मित्रो
(ii)मतदाता की ताकत

15.जया सिंह -

(i)मन को एक कॉपी की
 तरह बनाओ


16.किसमत्ती चौरसिया 'स्नेहा' -

(i)गांव की लड़की
(ii)..फिर भी हम जगतगुरू

17.लीला तिवानी -

(i)हार को ही उपहार बना ले

18.नरेश गुर्जर -

(i)तुम कौन हो

19.नीतू शर्मा -

(i)एकांकीपन

20.राजीव डोगरा 'विमल' -

(i)काल
(ii)कालकूट
(iii)काश !

21.राखी पटेल -

(i)ऋतुओं की रानी बरसात

22.रेखा पारंगी -

(i)रिश्तों की हरियाली
(ii)पहली मुलाक़ात

23.सच्चिदानन्द मौर्य -

(i)गुरु तुम्हारी महिमा में
 कहते हैं कुछ शब्द मेरे


24.डॉ०संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी -

(i)विधि की रचना प्यारी है
(ii)तुम मशीन क्यों बनतीं नारी?

गीत, गज़ल, इत्यादि

आलेख, कहानियाँ, व्यंग्य, इत्यादि

पुस्तक समीक्षा


1. कृपी कश्यप -

(i)संतोष पटेल के कविता संग्रह
 "जारी हैलड़ाई" की समीक्षा


2. मनोज जैन 'मधुर' -

(i)गरिमा सक्सेना की पुस्तक
 “है छिपा सूरज कहाँ पर”की समीक्षा


3. राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित" -

(i)आशुतोष कुमार झा की पुस्तक
 "द्वन्द" की समीक्षा


4.सुरेश सौरभ -

(i)नव निकष नये तेवर
 कलेवर में (पत्रिका चर्चा)




धारावाहिक उपन्यास


1.प्रबोध गोविल -

(i)राय साहब की चौथी बेटी [भाग-12]



अनूदित साहित्य


1. डॉ.रजनीकान्त एस.शाह -

(i) पद्मश्री डॉ.गुणवंतभाई शाह
 के लेख का हिन्दी अनुवाद

(ii) श्री वीनेश अंताणी
 के लेख का हिन्दी अनुवाद


साक्षात्कार


1.पद्मा मिश्रा -

(i)कन्हैया सिंह की बातचीत
 वरिष्ठ कवि एवं शिक्षाविद
 डा.अरुण सज्जन से


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