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वर्ष: 5, अंक 101, जनवरी(द्वितीय), 2021

लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुनर्प्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। साहित्यसुधा में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और साहित्यसुधा टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है। साहित्यसुधा एक सम्पूर्णतः साहित्यिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य सभी रचनाकारों को प्रोत्साहित करके हिंदी को बढ़ावा देना है | इसके माध्यम से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं को सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा।

साहित्यसुधा

सम्पादक

डॉ०अनिल चड्डा 'समर्थ'

Anil Chadah


साहित्यिक समाचार





बोली संवर्धन ऑनलाइ वीडियो कवि सम्मेलन सम्पन्न

साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को आयोजित बोली संवर्धन ऑनलाइन वीडियो कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रांतों के क्षेत्रीय भाषा पर काव्यमयी प्रस्तुति के लिए कवि गण उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को भव्य बनाते हैं मैं संयोजक नवीन कुमार भट्ट नीर स्वयं ऐसे कार्यक्रम के संयोजक होने पर गौरवान्वित हूं। 04 जनवरी 2021 को ..............पूरा पढ़ें


साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली द्वारा हुआ हिमाचल इकाई का भव्य उद्घाटन

साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में संस्थान की हिमाचल प्रदेश इकाई का उद्घाटन समारोह 06 जनवरी 2021 बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक भव्य आनलाइन छंदोत्सव के रूप में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष आद. आचार्य प्रवर डॉ वागीश शर्मा मुंबई आप राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त वक्ता, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ गंगा प्रसाद शर्मा जी, विशिष्ट अतिथि युगल दम्पती आद. हंसराज डोगरा जी व आद. सरोज कुमारी जी,..............पूरा पढ़ें



सम्पादक की ओर से

“मज़हब है हिन्दुस्तानी!”
 
मज़हबी बात न कर नादान, वतन की फिक्र कर नादान । तिनके-तिनके से बसता है घर, घर को बरबाद न कर नादान । एक ही खुदा के इंसां हैं सभी, कुछ खुदा की कद्र कर नादान । बाद मरने के कितनी चाहिये ज़मीं, ज्यादा लालच न कर नादान । घर हिंन्दुस्तान, मज़हब है हिन्दुस्तानी, इस बात से तो न मुकर नादान । - डॉ० अनिल चड्डा 'समर्थ'

अब तक

आपके पत्र


'बच्चों संग दीप ' कार्यक्रम  के इतने सुंदर  कवरेज  के लिए  साहित्य सुधा संपादक  जी को बहुत बहुत धन्यवाद 

Shobha Thakur (shobhat32@gmail.com)

साहित्य समाज का है दर्पण,
वह सच को सामने लाता है |
साहित्य सुधा सहयोग करें,
अपना कर्तव्य निभाता है I

नवंबर अंक को पढ़ा| काफी सुंदर उत्कृष्ट तरीके से पत्रिका का संपादन किया गया है |रचनाएं भी एक से बढ़कर एक एवं प्रेरणादाई हैं |पत्रिका इसी प्रकार अनवरत विकास पथ पर अग्रसर होते हुए असीम ऊंचाइयों को छुए इसी शुभकामनाओं के साथ अगले अंक की प्रतीक्षा में--

रीता तिवारी "रीत"
संप्रति: अध्यापिका, स्वतंत्र लेखिका एवं कवयित्री मऊ, उत्तर प्रदेश से
reetatiwari4588@gmail.com


विजय प्रभाकर नगरकर

महोदय

साहित्यसुधा का अंक नियमित रूप में प्राप्त हो रहा है। आपका संपादन और साहित्य अनुराग प्रशंसनीय है। सितंबर का अंक पठनीय है। ई पत्रिका के युग में स्तरीय पत्रिका प्रकाशित हो रही है। कृपया मेरे नए ई मेल पर पत्रिका भेजते रहिए।
vpnagarkar@gmail.com

भवदीय
विजय नगरकर
अहमदनगर, महाराष्ट्र

इस अंक में

गीत, गज़ल, इत्यादि

आलेख, कहानियाँ, व्यंग्य, इत्यादि

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