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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 69, सितंबर(द्वितीय), 2019

मेहमान

राजीव कुमार

वो बहुत प्यारा था और बहुत दिनों बाद शर्मा जी के घर आ रहा था। शर्मा जी ने बहुत खुश होकर अपनी पत्नी से कहा ’’ सुनती हो, आज आनन्द घर आ रहा है। परसों ही उसका फोन आया था। स्वागत-सत्कार में कोई किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।’’ तन्खवाह मिले दस दिन से ज्यादा हो चुके थे, इसलिए शर्मा जी, लाला जी से ब्याज पर रूपया ले आए। शर्मा जी की पत्नी को आनन्द की पसंद-नापसद का पुरा ख्याल था, इसलिए सामग्री का जुगाड़ पहले ही कर लिया। आज शर्मा जी भी दो दिन की दिहाड़ी कटाकर छुट्टी पे हैं और अपनी पत्नी का किचन मे हाथ बंटा रहे हैं। अचानक मोबाईल बजा, शर्मा जी ने हेलो बोला तो आवजा आई ’’ माफ किजीएगा, मैं इस सप्ताह नहीं आ पाउंगा। ’’ शर्मा जी अपनी पत्नी का मुंह देखने लगे ये सोचते हुए कि लाला का ब्याज भी चढ़ गया और दो दिन की दिहाड़ी भी गयी।


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