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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 69, सितंबर(द्वितीय), 2019

एक कदम था दूर

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

चन्द्रयान पर उतरना, एक कदम था दूर। किन्तु जरा सी चूक से, हुआ देश मजबूर।। -- विफल हुए तो क्या हुआ, मरा नहीं है जोश। अन्तरिक्ष विज्ञान का, पास हमारे कोश।। -- चन्द्रयान की विफलता, अन्तिम नहीं पड़ाव। और अधिक है बढ़ गया, अब तो चन्द्र-जुड़ाव।। -- एक विफलता से नहीं, मानेंगे हम हार। जग को फिर विज्ञान का, बाँटेंगे उपहार।। -- अनजान सी राह थी, अनजाना परिवेश। पायेंगे खोये हुए, फिर से हम सन्देश।। -- बन्द नहीं हमने किये, आशाओं के द्वार। अभी और सम्भावना, खोज रही सरकार।। -- सदा हार के बाद ही, मिल जाती है जीत। कोशिश करने से मिले, फल भी आशातीत।। -- हर छत्ते में तो नहीं, होता है मकरन्द। चन्द्रविजय के मिशन का, काम न होगा बन्द।। -- जारी हैं कोशिश अभी, लायेंगी वो रंग। जीवित अपना हौसला, कभी न होगा भंग।। --

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