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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



देह से इतर


सुशील शर्मा


                           	 	  
औरत की देह से इतर
औरत को किसी ने न जाना
पति के लिए देह सौंदर्य की मूर्ति
पुत्र के लिए स्तनों से निकला अमृत।
भाई के लिए देह सम्मान की तिजोरी।
पिता के लिए देह दूसरे की अमानत।
माँ के लिए देह चिंता की चिता।
पड़ोस के लिए व्यवहार का विषय
रिश्तों के लिए देह झुकी कमान।
देह से इतर स्त्री
शायद कभी किसी ने नही सोची।
देह से इतर स्त्री
किसी आकाश की तरह
जो होती तो है लेकिन
सोच से परे।
 

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