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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



भारतीयता की पहिचान (हिन्दी)


शम्भु प्रसाद भट्ट "स्नेहिल"


                           	 	   
भारतीयता की पहिचान, 
हिन्दी बिना अधूरी है।
इसीलिए हिन्दी की शिक्षा; 
सबके लिए जरूरी है।।
भारतीयता की पहिचान•••

हिन्दु हों या जैन बौद्ध हों,
सिक्ख पारसी भाई हों।
ब्राह्मण हों या अन्य वर्ण हों;
मुमलमान ईसाई हों।।
भारतीयता की पहिचान•••

आस्तिक हों या नास्तिक हों,
भारत देश निवासी हैं।
राष्ट्र के सत्य हितैषी;
निष्ठावान् विश्वासी हैं।।
भारतीयता की पहिचान•••

भारतीयता की संस्कृति से,
परिचय सबका जरूरी है।
संस्कृति बिना जीवनी सबकी;
सच्च में ही अधूरी है।।
भारतीयता की पहिचान•••

रहकर राष्ट्र में सबको,
हितकर कार्य करना ही होगा।
तभी विश्व में राष्ट्र हमारा;
उच्चस्थ सम्मान पा सकेगा।।
भारतीयता की पहिचान•••

हिन्दी के प्रचार-प्रसार पर,
ध्यान सबको देना होगा।
हर क्षेत्र में राष्ट्र एकता का;
संदेश प्रसारित करना होगा।।
भारतीयता की पहिचान•••

रोजगार के क्षेत्र में भी,
आज हिन्दी का ज्ञान जरूरी है।
इसीलिए जनता की शिक्षा;
हिन्दी बिना अधूरी है।।
भारतीयता की पहिचान•••
 

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