Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



ख़्वाहिश


रवीन्द्र कुमार दास


                           	 	
उसने पढ़ना शुरू किया 'अ'
मुझे लगा
आवाज़ के पीछे 
कोई गहरी अंधेरी सुरंग है
उसने आगे कहा 'आ'
मुझे उस अंधे कुँए में 
कोई छटपटाता महसूस हुआ
कोई बुलाता महसूस हुआ
उसके बाद भी
ज़रूर पढ़ाई जारी रही होगी 
मैं भागता रहा किसी दुःस्वप्न में 
कि चींखता रहा बेआवाज़
आवाज़ दो मुझे
झकझोर कर जगाओ मुझे
मैं जागना चाहता हूँ इस दुःस्वप्न से
और देखना चाहता हूँ
उसे समस्त स्वरों
और विभिन्न आस्वाद के व्यंजनों का
पाठ करते हुए
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें