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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



पेट की आग


चंद्र मोहन किस्कु


 
दो पत्थरों की टक्कर से
या दो डाली के घर्षण से
आग तो निकेलेगा ही
पर मनुष्य के
खाली पेट पर भी
आग जलता है
इससे सबका नुकसान
होता नहीं है
पर धनवान का अट्टालिका
ध्वस्त हो जाता है
इसलिए कह रहा हूँ
अरे वो नरम बिछावन में
सोनेवाले
भर पेट खाकर
मिठी डकारनेवाले
तुम्हारे पिटाई से
पीठ की चमड़ी उखड़ गई है
नोचने से
मेरा सर गंजा हो गया है
होशियार ______
क्योंकि अब मेरा पेट में
आग जल रहा है. 
 	 

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