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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



हाइकु


शुचि भवि


                           	 	
 
1.
बदरा आए नयनों में क्यों बोलो सावन छाए
2.
मतवाला ये मन हुआ आज क्यों कोई बताए
3.
मेघ आओ न धरती ने पुकारा प्यास बुझाना
4.
ज़ालिम हवा ले गयी देखो उड़ा मेरे बदरा
5.
सुनो पिया सावन अब आया लागे न जिया
6.
जीवन थोड़ा समझ ओ मानव स्वार्थ है रोड़ा
7.
आती है याद बीते दिनों की जब मन आबाद
8.
बच्चों को देना संस्कार सँग ज्ञान पुण्य ये बड़ा
9.
रिश्ता नहीं हैं अजनबी वो नहीं मेरे ही तो हैं
10.
काश वो आता साथ भला जिसका ज़िंदगी गाती
11.
पिता की याद चले जाने के बाद जीवन खाद
12.
मृत्यु सत्य है अंतिम सदा से ही मानता नहीं
13.
बच्चे आजके असमय हो रहे देखो तो बड़े
14.
साथ तुम्हारा सबसे न्यारा लगा प्यार है पगा
15.
जल्लाद सभी मानवता हनन आतंकवादी
16.
सबके दुख उतरते जिसमें ईश दें सुख
17.
साथ जिसका लगे सबको भला वो किसका
18.
उसी की तो हूँ जो नहीं कभी मेरा रैन बसेरा

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