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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



जीवन में संघर्ष अनेक


नरेंद्र श्रीवास्तव


 
जीवन में संघर्ष अनेक।
न रुक,न ही घुटने टेक।।

एक-दूजे का हाथ बटावें।
हर मुश्किल,आसाँ देख।।

दूर करें दूजे का दुख-तम।
खुद में खूब उजाला देख।।

तृष्णा,घृणा और असहिष्णुता।
हिंसा,नफ़रत,बदनीयती फेंक।।

जीवन में खुशहाली होगी।
हों हम त्यागी,निश्छल,नेक।।

जीवन का संघर्ष सिखाता।
हैं अनेक,बनकर रहें एक।।
            

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