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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



राक्षस


आरुषि बत्रा


एक बार की बात है एक हवेली में एक राक्षस रहता था। वह खतरनाक नहीं था लेकिन बदसूरत था। वह दयालु और नेक दिल था। वह बच्चों से प्यार करता था। लेकिन उसके डरावने रूप के कारण बच्चे उसके पास नहीं आते थे।

उसी गांव में एक अनाथ लड़की रहती थी।वह छः वर्ष की थी। वह एक बूढ़ी औरत के साथ रहती थी।उसका नाम अलिशा था। उसने कभी अपने माता-पिता को नहीं देखा था।

अलिशा के अनेक दोस्त थे। लेकिन एक लड़की थी जो उसे पसंद नहीं करती थी और वह जानती थी कि पुरानी हवेली में एक राक्षस रहता है। लेकिन उसे यह नहीं पता था की वो राक्षस दयालु है और बच्चों को प्यार करता है। उस बुरी लड़की ने अलीशा से कहा कि तुम्हारे मां बाप उस पुरानी हवेली में रहते हैं। उनके पास वैसा ही लाकेट है जैसा की अलिशा के पास है।यह सुनकर अलिशा तेजी से हवेली की तरफ दौड़ी और अंदर चली गई। अचानक वह राक्षस उसके सामने आ खड़ा हुआ। पहले तो वह डर गई लेकिन जब राक्षस ने उसके सर पर हाथ रखा और प्यार से बोला तो उसकी जान में जान आई।जब उस राक्षस को पता चला कि अलिशा अपने माता-पिता को ढूंढने आई है तो उसे बहुत बुरा लगा क्योंकि उसने भी अपनी बेटी खोई थी। उसने अलिशा से निवेदन किया कि वह उस के पास उसकी बेटी बन कर रहें और वादा किया कि मैं तुम्हारी पिता की तरफ देख भाल करुंगा। अलिशा खुशी खुशी उसके साथ रहने लगी। यह देख कर उसके सारे दोस्त भी वहां खेलने आने लगे। अब कोई भी उस राक्षस से नहीं डरता था। राक्षस भी बहुत खुश था। एक दिन अलिशा ने राक्षस से बताया कि उसने जब अपने माता-पिता को खोया था तब वह तीन महीने की थी। उसने बताया मैंने उन्हें नहीं देखा लेकिन मैरे गले में जो फोटो है शायद वह मैरे माता-पिता की है। राक्षस भावुक हो गया और उसने अलिशा को गले से लगा लिया। और वादा किया कि मैं तुम्हारे माता-पिता की कमी को पूरा करुंगा।

यह खबर कि बच्चे पुरानी हवेली में राक्षस के साथ खेलते हैं टीवी पर दिखाई जाने लगी। मीडिया पुरानी हवेली पहुंची । अलिशा का इंटरव्यू लिया गया जिसमें उसने वो लाकेट दिखाया जिसमें उसके माता-पिता की फोटो थी। सौभाग्य से यह प्रसारण उसके माता-पिता ने देखा और उस लाकेट को पहचान लिया अगले दिन वह उस शहर में पहुंचे जहां अलिशा रहती थी वह हवेली में गये अलिशा के गले में पड़ा लाकेट देख कर दौड कर उसे गले लगाया। और बताया कि उन्होंने उसे बाढ़ में खो दिया था। सब खुश थे परन्तु राक्षस उदास था कि अब वह फिर अकेला हो जायेगा अलिशा उसके पास गई गले लगा कर उसे बोली मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाऊँगी ।

सब ने निर्णय किया कि वह सब साथ में मिलकर हवेली में रहेंगे। और फिर हवेली एक बार फिर जगमगा उठी।


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