मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 92,सितम्बर(प्रथम), 2020

आज की लड़की

श्लेष चन्द्राकर

सोनिया को उसके ही गाँव के एक रसूखदार परिवार के लड़के लालू ने छेड़ा था। इस संबंध में आज पंचायत बैठी थी। पंचायत ने फैसला सुनाया कि, ... “लड़के से गलती हो गई इसे माफ कर दो। आगे से ये ऐसी हरकत नहीं करेगा। सोनिया तुम इसे राखी बाँधकर भाई बना लो।" यह फैसला सुन सोनिया को गहरा धक्का लगा- “नहीं, मैं ऐसा नहीं करूंगी। मैं उसके खिलाफ थाने में रिपोर्ट लिखाउँगी।" उसने निश्चय किया। “देखो लड़की, जब मामला ऐसे ही निपट जायेगा तो कोर्ट कचहरी का झंझट पालना ठीक नहीं है। तुम उसे राखी बाँधकर मामला यहीं खत्म करो।" पंचों ने अपना फैसला फिर दोहराया। “जो किसी की बहन-बेटी की इज्जत नहीं करता वह मेरा तो क्या किसी भी लड़की का भाई बनने लायक नहीं है। मैं तो उसे सजा दिलवाकर रहूँगी। ताकि, फिर किसी के साथ वह ऐसी हरकत न कर सके।" इस नाफरमानी के अंजाम की परवाह किए बिन, उस आज की लड़की ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें