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वर्ष: 1, अंक 4, अक्टूबर, 2016



श्रद्धा

सुभाष चन्द्र


व्हिस्की का दूसरा पैग लेने के बाद अचानक उसका विवेक जागा। उसने सामने बैठे मित्र से कहा, " भगवान ने इंसान बनाया, यह सरासर झूठ है।

दरअसल, इंसान ने भगवान बनाया है। जब समस्याओं का समाधान करने या सवालों का जवाब देने में वह सफल नहीं हो पाता है तो वह ' भगवान की मर्जी ' कहकर अपने को बचाने का प्रयास करता है।" खैर, अभी वह कुछ आगे बोलता कि उसे विदेश में रहने वाली बेटी ने फोन करके बताया कि उसको बहुत तेज बुखार है।

यह सुनते ही उसके दिमाग में बैठा दार्शनिकता का भूत रफूचक्कर हो गया और वह मित्र से बोला, " यूं यही श्रद्धा इंसान को दुःख बर्दाश्त करने की ताकत भी देती है। " इसके तुरंत बाद वह उठकर अपने घर के अंदर बने पूजा घर में गया और भगवान से बेटी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करने लगा।


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