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वर्ष: 1, अंक 4, अक्टूबर, 2016



दृष्टिकोण

डॉ० शुभ्रता मिश्रा


दृष्टि की अनंत गहराइयों कोणों की बहुआयामी स्थितियों से निर्मित क्षितिज की सीमाओं तक विस्तारित विराट-स्वरुप का परन्तु अतिसूक्ष्म-सा मानव भाव "दृष्टिकोण" मनुष्य को उसकी श्रेणियाँ प्रदान करने वाली अंकसूची है, जिसके प्रश्नपत्रों में मनुष्य के दृष्टिकोण को बच्चों को समझने, स्त्रियों को देखने, बुजुर्गों को आदर देने, सम्पन्नता को पचा पाने, दरिद्रता को अनुभव कर पाने, प्रेम को आत्मसात कर पाने, क्रूरता को सहन कर पाने, समाज को बदल पाने, राष्ट्र को कुछ दे पाने, के आधारों पर उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होना पड़ता है या फिर बार-बार परीक्षाएं देते रहते हैं लोग दृष्टिकोणों की चक्रव्यूहता को समझ पाने की उधेड़बुन में लगे रहते हैं लोग दृष्टिकोण मर्यादाओं की सीमाओं में होता है तो मनुष्य की जीत निश्चित है वरना अमर्यादित दृष्टिकोण कहीं का नहीं छोड़ता मनुष्य न घर का रह पाता है न घाट का ।।
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