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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



नफरत छोड़ो


नरेंद्र श्रीवास्तव


   
दो मिला तो एक को छोड़ा,
तीन मिला तो दो को।
छोड़ाछोड़ी क्यों करते हो?
ये गलत है,इसे रोको।।
चार मिला तो तीन को छोड़ा,
पाँच मिला तो चार।
सबसे प्रेम से मिलना सीखो,
नफरत छोड़ो यार।।
छह मिला तो पाँच को छोड़ा,
सात मिला तो छह को ।
सबको गले लगाओ हँस के,
गुस्सा दिल से फेंको।।
आठ मिला तो सात को छोड़ा,
नौ मिला तो आठ।
दिल की दिल से रखो करीबी,
दूरियों को पाट।।
दस मिला तो नौ को छोड़ा,
ग्यारह मिला तो दस।
पढ़ते रहो पाठ प्रेम का,
जब तक चलता वश।।
 

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