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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



मन्नत के धागे


कंचन अपराजिता


  
मंदिर की दीवारों के
मुख्य द्वार की
बगल में
एक लौह फेंसिंग है,
जिसमें मौली से 
बँधे हुये हैं,
अनेक लोगों के
मन्नत के धागे..
एक धागा
कहता है,
एक गाथा,
एक अधूरी इच्छा,
एक अधूरी कहानी,
एक न मुकम्मल
हो पायी
जिन्दगी की रवानी,
हाँ,बँधे है,
सभी के
कुंछ खास एहसास,
भर कर 
पूरी आस्था व विश्वास
कि पूर्ण हो जायेंगे वो..
ईश्वर भक्ति में
क्या अद्भूत शक्ति है 
मौली के धागे बाँध
अमीर-गरीब,
सुखी-दुखी,
स्त्री-पुरूष,
देशी-परदेशी,
सब ले जाते हैं,
अपनी मन्नत 
पूरी होने की आस..।
 

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