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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



हाइकु


सुशील शर्मा


 
1.
ताल पोखर जीवन को खोकर मानव हित।
2.
विकास क्रम कांक्रीट के जंगल ऊगते सांप।
3.
बढ़ता ताप मनुष्य के विष का अनुपातिक।
4.
एक जंगल मुट्ठी भर पादप असंख्य सांसे।
5.
नदी का हाल शहर की गंदगी बनी गटर।
6.
गांव का रूप शहर में जाकर बिगड़ा बच्चा।
7.
खेतों में अन्न रसायन का जिन्न रोग अभिन्न।
8.
बुलेट ट्रेन भूखा है आदिवासी हम है मौन।
9.
टूटते रिश्ते कैसा पर्यावरण भारी है बस्ते।
10.
मौन सदियां पेड़ वन नदियां किस्से कहानी।

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