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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



तितली रानी


प्रिया देवांगन "प्रियू"


                         
तितली रानी बड़ी सयानी , दिनभर घूमा करती हो ।
फूलों का रस चूस चूस  कर , पेट अपना तुम भरती हो।

आसमान की सैर करके ,  कितनी मस्ती करती हो ।
रहती हो सब मिल जुलकर , आपस में कभी ना लड़ती हो ।

इधर उधर तुम घूमा करती , पास कभी न आती हो ।
रंग बिरंगे फूल देखकर  , पास उसी के जाती हो ।
 

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