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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



उड़न खटोला पाते जी


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


                         
 
बढ़िया सा इक उड़न खटोला ,
काश कहीं से पाते जी ।
अपने भैया अजय - विजय संग ,
दूर गगन में जाते जी ।।

चाँद - सितारों की दुनिया में ,
खूब लगाकर चक्कर जी ।
बैठ मजे से फिर चंदा संग ,
हम खाते घी - शक्कर जी ।।

 

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