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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 73, नवंबर(द्वितीय), 2019

दारूबाज

राजीव कुमार

रोटीयाँ पका लेने के बाद अवधेश ने कहा ’’ जा पवन, होटल से मटर पनीर की सब्जी ले आ। ’’

संदीप ने कहा ’’ अरे कहाँ शराबी को भेज रहे हो, मैं भाग के जाता हूँ और ले आता हूँ। ’’

पवन ने कहा ’’ रोटी मेरा ईमान है। हम लोग रोटी के लिए ही इस शहर में आए हैं, रोटी की कसम , विश्वास कर मैं अभी गया और अभी आया। ’’

विश्वास करके पवन के हाथ में रुपया थमाया और दोनों अपनी थाली में रोटी तोड़कर , पवन का इन्तजार करने लगे।

पवन पूरा रास्ता यही बड़बड़ाता गया कि रोटी मेरा ईमान है। रोटी के लिए ही यहाँ आए हैं। दो मिनट की जगह पवन आधा घंटा में आया, नशे में धुत, उसके हाथ में सब्जी की जगह दो रोटी थी।


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