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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 73, नवंबर(द्वितीय), 2019

लत या जरूरत

राजीव कुमार

पहलवान चाय दुकान में सुबह चाय पी रहा था। पास खड़ा एक लड़का, फटेहाल कपड़े में खुद को ढंके था और एक दो आदमी से कहा ’’ बाबू जी चाय पिला दो। ’’ किसी ने एक न सुनी तो दस रूप्ये निकालकर उसको पकड़ाते हुए कहा ’’ लो चाय क्या पिएगा, कुछ खा भी लेना। ’’

वो लड़का वहां से चला गया। दुकान से निकलकर घर जाने लगा तो उसी लड़के पर नजर गई, हाथ में बीड़ी का बंडल था और एक बीड़ी का कश लगाते हुए ऐसे भाव दर्शा रहा था ’ भुख प्यास को धुऐं में उड़ता चला जा रहा हुं, यही जिन्दगी है और इसका साथ निभाता चला जा रहा हुं। ’


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