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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 73, नवंबर(द्वितीय), 2019

परिवार नियोजन का महत्व

पवनेश ठकुराठी 'पवन'

राजन राम और गणेश सिंह के परिवार एक ही गाँव में रहते थे। राजन राम काफी परेशान-सा रहता था। एक दिन गणेश सिंह ने उससे पूछा- "भाई राजन, तुम इतने परेशान से क्यों रहते हो ?" राजन ने बताया- "यार भाई साहब दिन-प्रतिदिन महंगाई बढ़ते जा रही है। परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। पांच बच्चे पहले से ही हैं और ऊपर से एक और आने वाला है। पता नहीं क्या होगा ?"

"एक और आने वाला है मतलब भौजी (भाभी) पेट से हैं ?"

"हां"

"हे भगवान, तुम अब अस्पताल जाकर नसबंदी करवा लो या परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करो। जितना बड़ा परिवार होता है उतनी ज्यादा परेशानियां होती हैं। मुझे देखो, दो बच्चे होते ही मैंने नसबंदी करवा ली थी। ईश्वर की कृपा से परिवार में अब तक सब कुछ अच्छा चल रहा है।"

"अच्छा, तब तो मैं कल ही शहर जाकर नसबंदी करवाता हूँ।" राजन अब परिवार नियोजन का महत्व समझ गया था।


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