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वर्ष: 1, अंक 5, नवम्बर, 2016



सही कौन


यतेन्द्र सिंह


एक दुबला पतला लङका ठेले पर कुल्फी बेच रहा था।गर्मी से वह पसीने से तर हो गया।सामने नीम के पेङ के नीचे खङा हो कर आराम करने लगा।उम्र से ज्यादा उस पर परिवार की जिम्मेदारी थी।स्कूल के बच्चो को देख कुछ आशा के बादल नजर आये।वह बच्चों को देख कर बोला ठंडी कुल्फी खाओ, गरमी दूर भगाओ।जो एक बार खायेगा वह बार बार खायेगा। सामने दारु के ठेके से सेल्स मैन निकला और बोला दूर हटा अपनी बीमारी को।बच्चो को खिला कर बीमार करेगा ।इस बीमारी को बेचने के लिए यही जगह मिली ।जल्दी हटा।सामने गुजरते हुए हैडमास्टर ने कहा तु कौनसा अमृत बेच रहा है।जिस को पीकर बस्ती वाले अमर हो जायेंगे। गरीब को डाट रहा। इतना सुनते ही सेल्स बङबङाता हुआ ठेके मे घुस गया।
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