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वर्ष: 1, अंक 5, नवम्बर, 2016



शायर हूँ किसी बेफ़वा का यार नहीं

अमिताभ विक्रम


शायर हूँ किसी बेफ़वा का यार नहीं, लिखता हूँ मोहब्बत पर किसी से प्यार नहीं। सुनता हूँ सबकी पर करता हूँ दिल की, लोग कहते हैं मुझे किसी का एतबार नहीं। तन का सौदा करने वालों एक मेरी भी सुन लो, ज़िस्म फरोशी से बुरा कोई कारोबार नहीं। अपनी तक़दीर पै ज़्यादा भरोसा मत करना, इसके भरोसे बैठना होता है मददगार नहीं। ज़िन्दगी के कागज़ को तूने पूरा रंग दिया, क्या सोचता है तुझसे बड़ा कोई कलाकार नहीं।
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