Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 5, नवम्बर, 2016



गीत - "दुःख के लिए कहाँ तक रोना"


राकेश श्रीवास्तव


दुःख के लिए कहाँ तक रोना चलो सुखों की बात चला लें। गणना कभी न की मिलने की, खोने का हिसाब रखते हैं । दुःख को सदा पराया समझा, पर सुख को अपना कहते हैं।। गम में भी खुशियो को ढूंढे कुछ ऐसे आधार बना लें।। चलो सुखों की बात चला लें 1 आहत क्या होना निजता पर होने वाले कुछ हमलों से। उपवन बनो बिखेरो खुशबू मत संकीर्ण बनो गमलों से।। बाधाओं से हार न मानें बढ़कर उनसे हाथ मिला लें चलो सुखों की बात चला लें 2 जोड़ गुणा रखना जीवन में बाकी भाग न आने पाये। स्वाभिमान का मान रखें पर दम्भ न मन में आने पाये।। नेह भरे मन के दीपक से समरसता की जोत जला लें। चलो सुखों की बात चला लें 3
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें