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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 96,नवम्बर(प्रथम), 2020

रिश्ते

चन्द्रकान्ता अग्निहोत्री

ऐसा नहीं था कि अंजू को खाना बनाना नहीं आता था |वह सब जानती थी फिर भी घर सारा काम गठिया होते हुए भी सास ही करती | रहते अलग मंजिल पर थे बेटा बहू और ग्राउंड फ्लोर पर माँ -बाप ,पर रसोई एक ही थी | कुछ दिन बाद अंजू के चचेरे भाई की शादी है |उनका घर उसके ससुराल से 12-13 किलोमीटर ही होगा लेकिन कुछ दिन अपने मायके रहने की अपेक्षा वह ससुराल से ही अप -डाउन करती थी |सास बिमला ने उसे समझाया भी कि कोरोना काल में इस तरह रोज़ जाना ठीक नहीं |कुछ दिन बाद ननद का फोन भी आ गया |उसने कहा ,’माँ -पापा बुजुर्ग हैं आपका इस तरह रोज़ घर से बाहर शॉपिंग करना ठीक नहीं | एकाध बार तो सावधानी भी बरती जाती है |’ .......तो ऐसा है पास ही उनकी बड़ी बेटी का घर है ,कुछ दिन के लिए वहां चली जाएँ |....मुझे तो हर हाल में जाना है | मेरे चचेरे भाई की शादी है मैं अपना सारा समान इतनी सर्दी में यहां वहां नहीं ले जा सकती |’ कह कर उसने फोन रख दिया |


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