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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 85, मई(द्वितीय), 2020

अटूट बंधन

पवनेश ठकुराठी

"देखो पवन ! अगर तुमने मुझे ज्यादा परेशान किया तो मैं तुम्हें छोड़कर चली जाऊंगी।" दीपिका रूठती हुई बोली।

"अरे ऐसे कैसे चली जाओगे ! शादी की है तुमसे। कोई मजाक नहीं। शादी का बंधन एक अटूट बंधन है। सात जन्मों तक इसे कोई नहीं तोड़ सकता।" पवन ने जवाब दिया।

पवन का जवाब सुनकर दीपिका के हृदय उपवन में प्रेम के पुष्प महकने लगे।


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