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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 61, मई(द्वितीय), 2019

पेट

राजीव कुमार

रामनाथ जी लगभग दो घंटे से अपने पेट में चाकु घुसेड़ने की कोशिश कर रहे थे। अचानक किसी ने दरवाजा पर दस्तक दी। दरवाजा खुलते ही पलटू को देखकर सकपका गए और रामनाथ के हाथ मे चाकु देखकर पलटू डर गया। रामनाथ जी ने चाकु मेज पर रखते हुए पुछा ’’ कहो, पलटू, कैसे आना हुआ? ’’ पलटू ने जवाब में कहा ’’ उड़ती हुई खबर सुनी इसलिए सुनाने चला आया। नौरंगी कहता है कि रामनथवा मेेरे पेट पर लात मारा है, उसके पेट में चाकु घुसेड़ दुंगा।’’

पलटू के जाते ही रामनाथ जी अपने पेट में चाकु घुसेड़ने की कोशिश करने लगे। जब भी अपनी कुंवारी बेटी के बढ़े पेट के बारे में सोचते तो चाकु घुसेड़ने की कोशिश करते लेकिन अपने पुरे परिवार के पेट के बारे में सोचकर इरादा बदल देते। अंततः रामनाथ ने चाकु दुर फेंका और चल दिए काम पर , अब उनको नौरंगी की बातों का कोई डर नहीं रहा।


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