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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



दर्द से दुआ-सलाम कर ही लेते हैं


डॉ० अनिल चड्डा


 
दर्द से दुआ-सलाम कर ही लेते हैं,
आंख में दो अश्क रोज भर ही लेते हैं।

बीत जायेंगे ये पल, हमेशा की तरह,
आने वाले कल से बात कर ही लेते हैं।

सोच पे न काबू हो तो बात क्या करें,
फिर भी गुफ्तगू जनाब कर ही लेते हैं।

सोने से ही आयेंगे न ख्वाब हर समय,
जागते हुए भी याद कर ही लेते हैं।

इल्जाम लगें तो दिल हारना नही,
लोग अक्सर घात दिल पे कर ही लेते हैं।
 

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