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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



रंगीन तन


राजेश मेहरा


शादी को सात महीने गुजर गए थे। उसका पति उसे गांव से शहर में ले आया । इन सात महीनों में उसने महसूस किया कि उसका पति उससे खुश नही है।

उसका पति अक्सर ही अपने ऑफिस की उनकी एक महिला दोस्त को ले आते थे और फिर बन्द कमरे से उसे केवल हंसने और ख़िलखिलाने कि आवाजे आती थी। उसके पति की महिला दोस्त मेकअप करके उससे ज्यादा सूंदर ओर मॉडर्न लगती थी।

वो जब भी आती थी उसकी तरफ कुटिल हंसी के साथ देखती।

उसने महसूस किया कि उसकी गृहस्थी अब नही बचेगी।

वो दिल की साफ और दयालु महिला है लेकिन शहर में कहां इन चीज़ों का क्या मोल ।

उसके नाक नक्श भी ठीक है लेकिन ग्रामीण परिवेश में कहां कोई मेकअप पर ध्यान देता है।

उसने अपने पति को बहुत प्यार और सम्मान दिया लेकिन अपनी तरफ आकर्षित नही कर पाई।

उसने एक आखिरी कोशिश करने की सोची ताकि वो अपनी गृहस्थी को बचा सके..।

उसने शाम को ब्यूटी पार्लर जाकर मेकअप करवाया और अंग दिखाऊ कपड़े पहन अपने पति का इंतजार करने लगी।

शाम को पति फिर उस अपनी दोस्त के साथ आये।

रोज की भांति वो दरवाजा खोल रसोई में चली गई। उसका पति लेकिन अब केवल उसको ही देखे जा रहा था। गांव का शरीर और ऊपर से मेकअप,वो लग भी बहुत सुंदर रही थी।

अन्य दिनों से उलट आज उसके पति ने उस महिला दोस्त को जल्दी विदा कर दिया और आकर उससे लिपट गया। वह उसे अपने प्यार की दुहाई देकर उसके रूप की बहुत तारीफ कर रहा था।

वो भी अपने आंखों में आंसू लिए अपने पति से लिपटी थी और शायद अपनी गृहस्थी को बचाने में सफल रही लेकिन अपना साफ मन और तन को रंगीन करके क्योंकि ये दोनों ही रंगीन न हो तो आज के जमाने मे इनकी कोई वैल्यू नही।


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