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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



निजी मजदूर सरकारी मजदूर


राजेश मेहरा


आज मजदूर दिवस है। निजी कारखाने के मालिक ने सुबह सुबह ही सबको बुलाया । मालिक ने कहा कि यदि तुम सब मेहनत करोगे तो ये कारखाना ओर तरक्की करेगा।

'लेकिन आज तो मजदूर दिवस है आज तो छुट्टी होनी चाहिये और यदि आपने काम की जोर जबरदस्ती की तो हम इसका विरोध करेंगे। ये हमारा हक़ है।'-एक मजदूर बोला

मालिक कुछ नही बोला बल्कि उसी समय अपनी सिक्योरिटी को बुलाया और उसे कारखाने से बाहर निकाल दिया। ये देख सब मजदूर अपने काम पर लग गए। मालिक मन ही मन मुस्कुराया। उनका मजदूरों को तोड़ने का ये फार्मूला हर बार काम करता था।

उधर सरकारी संस्थान में मजदूरों को उनके अफसर ने बुलाया और उनको मजदूर दिवस की खुशी में मिठाई बांटी और बधाई दी। वो आगे बोले-'चलो अब सब काम पर लग जाओ, हमे अपना टारगेट पूरा करना है।' उसी समय यूनियन का प्रधान आगे आया और बोला-'कोई काम नही करेगा, आज मजदूर दिवस की छुट्टी है और यदि जबरदस्ती की तो नुकसान के तुम खुद जिम्मेवार होंगे।' सभी मजदूरों ने उसी समय मजदूर एकता का नारा लगाया।

प्रधान के चेहरे और मजदूरों का रौद्र रूप देख तुरन्त अफसर ने भी अपना रंग बदला और झूठी हंसी हंसते हुए बोला-'अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था जाओ मजे करो।'

तुरन्त सारे मजदूर हंसते हुए बाहर निकल गए। अफसर ने अपना पसीना पोंछा और कुछ देर के लिए तो वह मजदूरों के संगठन को देख घबरा गया था।


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