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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



चालीस पार की औरतें


सपना परिहार


           
हजारो मन में ख्वाइश
और अरमान दबा लेती है,
हल्की -हल्की झुर्रियों को 
मेकअप से छुपा लेती है,
लोग क्या कहेगे ये सोच कर
अपनी खुद की खुशियों को
सबसे छुपा लेती है ,
चालीस पार की औरते
भी सीने में दिल लिए होती है।
हर बार क्यों उसे उसकी 
उम्र की दुहाई दी जाती है ,
इस उम्र में ये शोभा नही देता ,
ये बात हर बार बताई जाती है।
बात चीत से लेकर कपड़ो तक 
हिदायत दी जाती है,
माँ आप पर ये सब अब सूट नही होगा 
खुद के बच्चो द्वारा ये बात बताई जाती है ।
खुल कर मुस्कुराने पर पाबन्दी लाद जी जाती है ,
चालीस पार की औरते
अब कहाँ अपने मन का कर पाती है ।
खूबसूरत दिखने की चाह में
थोडा श्रृंगार क्या कर जाती है ,
अपनों से ज्यादा पड़ोसियों 
की आखों में खटक जाती है।।
उम्र अपनी खुशियों का 
पैमाना नही होती ,
अरमानो को पूरा करने मे यें
उम्र रोड़ा नही बनती 
चालीस पार की औरते 
क्या मन में कोई ख्वाइश नही रख सकती ।


                     

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