Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



इस इश्क़ को भी लिख दे


रश्मि सिंह


           
ओ रे कवि
तुझे बस महबूब के प्रेम में 
इश्क़ नजर आता है
तन्हाई में 
इंतज़ार नजर आता है
फौजी की पत्नी का
जुदाई नजर आता है
तू खुल के लिखता है
इस सृंगार को 
अपने शब्दों से रचता है
रात रात भर सोचता है
कभी चाँद को कभी तारो को
जड़ता है 
महबूब की आँखों को लिखता है
प्यार और तकरार को लिखता है
ओ रे कवि
कभी तू माँ के इश्क को भी लिख दे
पिता के जुनून को लिख दे
तिनका तिनका जोड़ कर जो
आज शब्दो को जोड़ना जिस 
दादा दादी ने राजा रानी की
कहानियो से सिखाया था
तू अपने जीवन के उस अनमोल 
हिस्से को भी लिख दे
ओ रे कवि
कभी तू अपने उस एहसास 
को भी लिख दे
जिसने तुझे प्रेम को लिखना सिखाया 
आ आज ही अपने पन्नो पर
स्याही बिखेर दे
ओ रे कवि आ इस इश्क को भी लिख दे!!!
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें