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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



ठंडे झरने


डॉ.मनोहर अभय


  
तुम्हारी कमर में पलीता बाँध कर  
बनैले  अंगरक्षकों ने यहाँ भेजा है
दबाओ पलीते का बटन
देखूँ
कितने गाँव, शहर ,महानगर
फूँक सकते हो 
छीन कर मासूम मुस्कान 
किसी की तरुणाई
किसी का शैशव

मेरे दोस्त !
नायाब शराब 
शहद की नदी 
और हूरें तो यहाँ भी मिल सकतीं हैं
उसके लिए कमर में पलीते नही बाँधे जाते 
--की जाती है मश्कत
 लम्बे नाखून तराश कर|

फेंक दो किसी समुन्दर  में
कंधे पर रखी आर डी एक्स  की गठरी
मैं तुम्हें शहद की नदी तक पहुँचा दूँगा
नंगे  पाँव 
पार करते हुए ठंडे झरने

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