Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



फ्रेम से रिसते अर्थ


किरण राजपुरोहित ‘नितिला’


शब्दों से कविता निचोड़ कर 

फ्रेम बना दिया है फकत

सूखे-बेरंग में दिखने लगी दरारें

रिसने लगे हैं अर्थ

रेले में अपना दर्द गाते हुये

गुहार करते

पुकार करते

कविता की -
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें