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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



हम भाग के चले
( खुशी के लिए )


धर्मेन्द्र अहिरवार


 
हम भाग के चलेंगे ख़ुशी, हम भागेंगे 
देखना एक दिन हम जीत जायेंगे
पर हम जीतने के लिए कभी नहीं भागेंगे 
हम जीने के लिए भागेंगे 

चाहे हम हमेशा न स्वीकारें जाएँ 
या हमेशा ही नकार दिए जाएँ 
हम भाग के चलेंगे क्योंकि हमें दुनिया को 
एक नाइ चाल चलने की संभावना देना है 

हम अपने लिए भागेंगे 
हम उनके लिए भागेंगे जो भाग नहीं सकते 

हम कभी नहीं रुकेंगे
क्योंकि भाग के चलना हमारी अपनी चाल है
और हम अपनी चल में ‘भाग के चलेंगे’
बहती हुई मुस्कराहट की तरह 
बहती हुई नदी की तरह 

हम भाग के चलेंगे 
पर किसी और को हराने के लिए नहीं 
हम हम भाग के चलेंगे ताकि ख़ुद से जीत सकें 

 

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