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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



नाम में ही तो सब कुछ है


डॉ० अनिल चड्डा


 
शेक्सपियर ने कहा था
नाम में क्या रखा है 
पर क्या शेक्सपियर
किसी और नाम से 
जाना जाता है? 
किसी और नाम से 
याद किया जाता है?
गांधी, लेनिन इत्यादि भी तो
नाम से ही जाने जाते हैं
यदि उनका 
कोई और नाम होता
तो वह उसी नाम से 
जाने जाते 
नाम में ही तो 
सब कुछ है 
इसीलिये तो 
सब में 
यह जज्बा होता है कि 
उनका नाम हो
और लोग उन्हें
जानें, पहचानें 
किसी के 
जग से जाने के बाद 
उसके कर्मों को
नाम से ही तो 
सम्बद्ध किया जाता है 
इसलिये
नाम में ही 
सब कुछ है 
नाम में ही तो
सब कुछ है 
 

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