Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



आजकाल के लोग


महेन्द्र देवांगन माटी


  
पढ़ना लिखना छोड़ के, खेलत हे दिन रात ।
मोबाइल ला खोल के, करथे दिन भर बात ।।

आजकाल के लोग मन , खोलय रहिथे नेट ।
एके झन मुसकात हे , करत हवय जी चेट ।।

छेदावत हे कान ला , बाला ला लटकात  ।
मटकत हावय खोर मा , नाक अपन कटवात ।।

मानय नइ जी बात ला , सबझन ला रोवात ।
नाटक करथे रोज के, आँसू ला बोहात ।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें