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वर्ष: 2, अंक 37, मई(द्वितीय), 2018



सबसे अच्छे मम्मी-डैडी !


डॉ० अनिल चड्डा


 

मेरी मम्मी सबसे अच्छी,
मुझे खूब प्यार वो करती,
पापा मेरे उससे अच्छे,
मेरे संग हैं खूब खेलते,
सुबह-सवेरे उठ कर आते,
प्यार से मुझको दोनो उठाते,
मम्मी मेरी खाना बनाती,
पापा मुझे तैयार कराते,
खुशी-खुशी मैं बस्ता लेता,
पापा स्कूल छोड़ कर आते,
स्कूल से जब मैं लौट के आता,
मम्मी से मैं खाना खाता,
होम-वर्क मैं अपना करके,
गोद में मम्मी की सो जाता,
शाम को जब पापा हैं आते,
पार्क में मुझको खेल खिलाते,
थक के जब मैं लौट के आता,
गर्म-गर्म फिर खाना खाता,
रात को सोने से पहले मैं,
अगले दिन का बैग लगाता,
जूते पालिश करके रखता,
यूनिफार्म तैयार मैं रखता,
तुम भी ग़र ऐसे बन जाओ,
प्यार डैडी-मम्मी से पाओ,
दोनो जब हमें प्यार हैं करते,
दुनिया से न्यारे हैं लगते !

 

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