Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक13, मई(द्वितीय), 2017



चमकती धूप – पाठशाला

डॉ. रानू मुखर्जी


   प्रेम, मानवीय संवेदना से पूर्ण तथा बाल शिक्षण का मूर्त रुप है डॉ. जूंही दत्ता और उनकी मानस पुत्री है “श्रोतश्विनी” ! २००६ में बांग्ला कलचर के प्रचार प्रसार के लिए “श्रोतश्विनी” ट्रस्ट की स्थापना उई और २०१० मे इसका रेजिस्ट्रेशन हुआ ! संस्था के सदस्यों में मित्रता और सकारात्मक विचारों की प्रधानता होने के कारण संस्था ने उन्नयन मूलक कार्य किए गए ! समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों के प्रस्तुतिकरण के कारण बडोदा के बंगवासी अति जोश के साथ रवीन्द्र संगीत गुनगुनाने लगे !

   कोमल ह्रदय की होने के कारण जब इन्होने समा स्पोर्टस क्लब के निर्माण कार्य मे रत मजदूर के बच्चों को दिशाहिन रुप में भटकते हुए और मजदूरी करते हुए देखा तो उनका मन विद्रोह कर उठा ! एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा भी यह फर्ज बन जाता है कि इन कोमल नादान बच्चो को एक सुनहरा उज्जवल भविष्य मिले इनके लिए प्रयास करे ! अतः २०१३ में उन मजदूर के बच्चो को पढाने का बेडा उठाया गया ! जिसकी मुख्य कर्णधार बनी डॉ. जूंही दत्ता जिन्होने नवरचना इन्टरनेशनल स्कुल की नौकरी छोडकर इन बच्चों को लेकर जगह के अभाव में फुटपाथ पर बैठकर पढाने लगी ! इस तरह पाठशाला का जन्म हुआ !

  यह काम इतना आसान नहीं था ! कोन्ट्राक्ट पूरा होने पर मजदूर काम की खोज में दूसरी जगह जाने लगे ! तब उन बच्चों में से १० बच्चों ने जूंही मेडम से और आगे पढने की इच्छा जताई “मेंडम हमें पढना है, हमें आपके साथ रख लो ! “ बच्चों के इन बातों ने जूही दत्ता और बच्चों को पढानेवाली अन्य महिलाओं के मन में एक नई जोश भर दी ! जूही दत्ताजी इस मामले में भाग्यशाली हैं कि उनकी पूरी टीम का सहयोग हर क्षेत्र में उनको मिलता रहा है !

  उन्होने एक नया कदम उठाया एक दाता की मदद से समा में उन्होने दो फ्लेट खरीदकर बच्चों के रहने-खाने और पढने की व्यवस्था कर दी ! आज वो बच्चे उस फ्लेट में नवरचना हाई स्कुल की आर्थिक रुप से तंग लोगों के लिए स्कुल, “ नवप्रेरणा “ में पढ रहें है !

  इन बच्चों के उन्नंत भविष्य के लिए आज “श्रोतस्विनी ट्रस्ट” ने १). एम. एस. युनिवर्सिटी के मेन ओफिस के बाहर फुटपाथ के निवासियों के लिए एक पाठशाला २). सयाजीगंज परशुराम भट्टे के सुभाषनगर झुपडपट्टी के रहेनेवालों के बच्चों के लिए एक पाठशाला ३). न्यु.वी.आई.पी.रोड सरदार एस्टेट क्रोसींग रोड पर के फुटपाथ निवासियों के बच्चों के लिए एक पाठशाला ४). समा संजयनगर के पास नेहरुनगर के स्लम के बच्चों के लिए लाईब्रीरी और पढने के लिए एक पाठशाला और ५). समा के फ्लेट में रहेनेवाले मजदुरों के बच्चो का हॉस्टल, इस प्रकार से पांच विभिन्न स्थानों में कुल १६० बच्चों के प्राथमिक शिक्षा के साथ साथ स्वस्थ जीवन निर्वाह की कला की शिक्षा देने का कार्य कम से कम १५ से १६ महिलाएं कर रही है !

  ये बच्चे जो मजदुरी के बाद शाम को भीख मांगने जाते थे इसे डॉ. जूई दत्ता जी ने बन्द करवाया ! इनको सिखाया “ किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना है !” संस्था के प्रत्येक सदस्य के लिए यह बडे गर्व की बात है कि उनके सिखाये गए ये बातें बच्चो के मन मे इस तरह बस गई है कि उन्होने भीख मांगना छोड दिया है

  पाठशाला के ये सभी बच्चे सुबह ९ बजे से लेकर ११-३० तक पढने आते है ! “ हमारी मुठ्ठी में है आकश सारा….” प्रार्थना के बाद योगा और फिर पौष्टीक नाश्ता दिया जाता है ! इसके बाद बच्चों के मानसिक स्तर के अनुसार उनको हिन्दी, अंग्रेजी, गणीत, गुजराती, पर्यावरण पढाया जाता है जो कि कक्षा पहली से लेकर पांचवीम तक का अभ्यास क्रम होता है !

  इनका यह दौर बडा संघर्षमय और कठीन रहा और है भी ! सुरक्षा सेतु प्रोजेक्ट के अन्तर्गत बडौदा सीटी पोलिस ने पाठशाला के तीन सेन्टर के बच्चो को पोलिस ट्रेनिंग स्कुल में हर सुबह पढने को व्यवस्था कर दी थी ! पर वह प्रोजेक्ट २०१६ में समाप्त हो जाने के कारण सब फिर से फुटपाथ पर आ गये ! शुरुआती दौर में फुटपाथ पर चटाई बिछाकर पढते थे !

  ईश्वर की कöपा से एम.एस.यु. के मेनेजमेन्ट फेकल्टी के कम्पाउन्ड में आजकल पाठशाला के बच्चे पढते है ! पूरा परिसर साफ सुथरा और व्यवस्थित रहे इस पर जूई दत्ता जी की तीव्र द्रष्टी रहती है ! कम से कम ८० से ९० बच्चे रोज यहा आते हैं, पढते है, खेलते है, व्यायाम करतें है, नöत्य-गीत-नाटक सीखतें करतें नजर आते है !

  इन सबके लिए मनोबल, सहनशक्ति और मानसिक प्रस्तुतिकरण की आवश्यक्ता है ! बच्चों की भाषा और बर्तन में सुधार के लिए सहनशीलतां के साथ स्नेहमय व्यवहार की अति आवश्यक्ता है जो की जुई दत्ता और उनके सहयोगियों के पास प्रचुर परिमान में है ! बच्चों को उज्जवल भविष्य के बारे में बताना, स्वस्थ्य, जीवन जीने की शिक्षा देना और एक अच्छा इनसान बनने की प्रेरणा देना इस संस्था का मूल उद्देश्य है ! इन सबको बच्चो के लिए काम करते हुए देखना बडा अच्छा लगता है ! धैर्य के साथ शांति बनाए रखतें हुए अपना काम करते है ! मैने इनको फुटपाथ पर बैठकर बच्चो के लिए आधार कार्ड बनाते उए देखा है !

  ये तो गई “ पाठशाला “ की बातें अब “ पाठभवन “ के बारे में जानतें हैं जिसके कारण वहां के बच्चे इतने तेज है और कुछ अच्छा सीख पातें है ! यह बच्चो का लायब्रेरी और एक्टिवीटी सेन्टर है ! इसके पास ही होस्टेल है जिसका नाम है पाठशाला.कोम ! वहां ११ बच्चे ३ साल से रहकर पढाई, खेलकूद, चित्रकारी आदी सीख रहें है !

  “ चुरनी “ नामक श्रोतस्विनी की एक और शाखा है इसमे १६ महिलाए और लडकियां है जो बैग, कूशन कवर, बेड स्प्रेड, स्टोल, अदि बनातें हैं और एक्जिबीशन के माध्यम से वह लोगों तक पहुंचता है ! विदेशों मे भी इसकी मांग है!

  अपनी इस मानस कन्या के लिए डॉ. जुई दत्ता जी तथा उनके सहयोगियों ने एक सपना देखा है!

  और वह है एक बडा सा होस्टेल….जहां कम से कम १०० बच्चों के आवास की व्यवस्था हो सके ! जहां रह कर बच्चे पढेगें, सिखेगें और बडे होकर बंद अन्धार भरे जीवन जीनेवाले लोगों के जीवन को उजाले से भर देगें !

  इसके लिए सांवली के पास “लसुन्द्रा” गांव में जमीन ले लिया गया है ! कुछ समय के अन्तर्गत इसका निर्माणकार्य भी आरम्भ हो जाएगा ! एक स्तुत्य कार्य परन्तु इसके लिए आर्थिक सहयोग की अति आवश्यक्ता है ! समाज के समुन्नत, शिक्षित, प्रतिष्ठित, वर्ग अवश्य ही इस महत कार्य में अपना सहयोग देगें ! पाठशाला के बच्चे आपके सहयोग की आशा में है !

  डॉ. जूंही दत्ता जी को उनके इस महत कार्य के लिए पश्चिमांचल हिन्दी प्रचार समीति ने ८ मांर्च, महिला दिवस को शाल, मोमेन्टो, पुष्प्गुच्छ देकर सन्मानित किया !

  लिन्क नीचे दे रही हुं इसकी सहायता से इनकी साधना के बारे में विस्तार से जाना जा सक्ता है !

Website : www.pathshalabaroda.org
17 J.M.K. Apartment
H.T. Road, Subhanpura,
Baroda-390023
Mob. 9825788781
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें