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वर्ष: 1, अंक 13, मई(द्वितीय), 2017



रोज नया इक पेड़ लगा रे

डॉ० अनिल चड्डा

आओ मिल कर पेड़ लगायें,
हरे - भरे मैदान बनायें,
रंग – बिरंगे फूल खिलायें,
धरती माँ को खूब सजायें।

शांति बहुत पेड़ हैं देते,
मूक हैं, फिर भी बात हैं करते,
प्रदूषण को ये दूर भगाते,
वायु को हैं स्वच्छ बनाते।

पेड़ हमें हैं भोजन देते,
लकड़ी, कपड़ा, कागज देते,
और दवा के काम भी आते,
छाया से हैं सुख पहुँचाते।

पेड़ों से है वर्षा आती,
और बाढ़ भी है रुक जाती,
मिट्टी को उपजाऊ बनाते,
पत्थर खा ये फल हैं खिलाते।
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