Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 36, मई(प्रथम), 2018



देवी या चुड़ैल


मनोज कुमार 'शिव'


आज चुटकी बहुत खुश थी। खुश हो भी क्यों न आज नवरात्र अष्टमी थी। सुबह से गांव के लगभग हर घर में कन्या पूजन के लिए नन्ही लड़कियों को बुलाया जा रहा था। चुटकी को भी एक दो घरों में बुलाया गया था। दोपहर को जब वह घर पहुंची तो किसी नन्हीं देवी का रूप लग रही थी। सर पर लाल चुनरी, माथे पर लाल टीका, हाथों में सुंदर सुंदर रंग बिरंगी चूड़ियां । लोगों ने दक्षिणा में दिए पैसे उसने अभी भी मुठी में भींच रखे थे।

'सुबह से कहाँ थी तू, चुड़ैल कहीं की! आँगन में झाड़ू लगाने को तेरे हाथ दुखते हैं' सौतेली माँ उसके हाथों से पैसे छीनते हुए चिल्लाई।

आँगन बुहारने के लिए हाथ में झाड़ू थामे चुटकी यह सोचकर असमंजस में थी कि वह देवी है या चुड़ैल।

नन्हें हाथ झाड़ू से आँगन में बिखरी गंदगी को साफ़ करने में व्यस्त हो गए थे।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें