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वर्ष: 1, अंक 12, मई(प्रथम)2017



आत्मविश्वास

नर्मदा प्रसाद कोरी


   बेटी की शादी तय हो गई थी। शादी का मुहुर्त 26 जून को था। अन्य तिथियों पर शादी सम्पन्न होने की कोई गुंजाइश नहीं थी। बेटी कीशादी बड़े धूम-धाम से करने के अरमान किस माता-पिता के नहीं होते। शादी, लॉन, मंगल कार्यालय कोई खाली नहीं था। जून के अंतिम सप्ताह में बरसात होने की पूरी-पूरी संभावना होती है। घर के सामने बड़ा सा खाली मैदान तो था परन्तु कोई भी टेन्ट डेकोरेषन वाला टेंट लगाने को तैयार नहीं हो रहा था। कारण, बरसात की शुरूआत जोर की हवाओं के साथ होती है। पाल-त्रिपाल, सजावट सारी नष्ट हो जाती है। सब कुछ ढह जाता है, उड़ जाता है, कीचड़ मे गंदा हो जाता है। टेंट वालों का कहना था कि जितने का हमें फायदा नहीं होगा उससे कई गुना हमारा नुकसान हो जायेगा और ऊपर से कोई दुर्घटना हो जाये तो और मुसीबत हो जायेगी। ऐसे में हमारा एक परिचित का टेंट डेकोरेषन वाला बड़े मुष्किल से तैयार तो हो गया, फिर भी उसके मन में बड़ा डर था। क्या होगा? शादी की तैयारियां चल रही थीं। टेंट डेकोरेशेन वाला भी अपनी टीम को लेकर टेंट लगाने के काम में जुट गया। जिस दिन शादी थी, उस दिन टेंट वालों ने पूछा, अंकल जी पानी से बचने के लिए तारपोलीन (त्रिपाल) कहां-कहां लगानी है। उस समय हम, बारात जिस होटल में ठहरी थी,वहां उपस्थित थे। टेंट वाला फोन पर हमसे बात कर रहा था। लड़की के माता-पिता ने टेंट वाले को फोन पर ही बड़े विष्वास के साथ कहा हमें पूरा विष्वास है, कोई आंधी-पानी नहीं आने वाला है। कोई तारपोलीन लगाने की जरूरत नहीं है। तुम सिर्फ अच्छे डेकोरेशन पर ध्यान दो। सारी गारंटी हमारी है। कोई भी तारपोलीन नहीं लगाई गई, शादी सम्पन्न हो गई। बेटी बिदा हो गई। दूसरे दिन टेंट वाला टेंट का सामान भी ले गया। तीसरे दिन हमने टेंट वाले को अपने पैसे ले जाने के लिए बुलाया। जब हमने टेंट वाले को पैसे भुगतान किए तो टेंट वाले ने कहा अंकल जी एक बात बताइए, आपको इतना विष्वास कैसे था कि आंधी-पानी शादी के दिन नहीं आयेगा। तब हमने कहा था, बेटा हमें पूरा भरोसा था ऊपर वाले पर, ऊपर वाला जानता है कि हमने कभी कोई गलत काम किया ही नहीं है, तो हमारे साथ गलत काम कैसे हो सकता है। चाय की अंतिम चुस्की लेते हुए टेंट डेकोरेशन वाले ने जेब में पैसे रखे और चलने को तैयार हुआ और बादलों की गड़-गड़ाहट के साथ पानी की बौछार पड़ना शुरू हो गईं। टेंट वाले ने हम दोनों को नमस्ते कहा, अब मैं चलता हूँ।

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