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वर्ष: 1, अंक 12, मई(प्रथम) 2017



जिन्दगी भी मुस्कुरा देगी

गोवर्धन यादव

                      
                       		
			प्रीत  के गीत मुझे दे दो
			तो,मैं उम्र भर गाता रहूँ
			प्रीत ही मुझे दे दो  तो
			मैं जिन्दगी भर संवारता रहूँ 
					 
					  जब मैं तुम्हारी सरहद में आया था
					  याद करूं तो कुछ याद न आया था
					  एक अजब खामोशी व खुमारी  थी
					  जो मुझ पर अब तक   छाये   है
					    
			खामोशी के राज मुझे दे दो
			कि मैं चैन की बंसी बजाता रहूँ
			गीत नये-नये गाता   रहूँ
			गीत नये-नये गुनगुनाता  रहूँ
						
						तुम तभी  से  अपने  हो
						जब  चांद  तारे भी  न थे
						ये जमीं आसमान भी न थे
						तुम तभी से साथ हमारे थे

			गीतों के बदले जिन्दगी भी मांग लोगी
			तो मुझे तनिक भी गम न  रहेगा
			क्योंकि मुझे  मालुम  है   कि
			गीतॊं के बहाने नयी जिन्दगी लेकर
			तुम  द्वार  मेरे  जरुर   आओगी

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