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वर्ष: 1, अंक 12, मई(प्रथम) 2017



अब तुम आयीं

गोवर्धन यादव

                      
                       		 लहरों पर इठलाती
				बलखाती     धूप
				बस ऐसे ही छा जाता
				तुम्हारा यौवन रुप

               					कमलाकर को पाकर
						जैसे खिल पडा कमल
						याद आते ही  बस
						हंस   पडा      दिल
				पक्षियों का किल्लोल
				रिझाने वाले   गाने
				लगता रह-रह   कर
				दे रही मुझको  ताने
						मंथर गति से चलती
						इठलाती मदमाती पुरवाई
						लहरों पर इठ्लाती बलखाती
						लगता अब तुम आयीं


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