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वर्ष: 1, अंक 12, मई(प्रथम) 2017



तुम्हारी तरह अगर भूल पाता मैं

डॉ० अनिल चड्डा

तुम्हारी तरह अगर भूल पाता मैं,
तो जिंदगी ख़ुशी से काट  पाता मैं।

फूल किस्मत में मेरी होते अगर,
तो संग काँटों का  तो न पाता मैं।

जवानी यूं ही  न ढल जाती  मेरी,
तो  कभी तो तुझे बुला पाता मैं।

तुम भी याद करते हो कभी हमें,
पता होता तो बात कर पाता मैं।
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